About Swami Ji

परमपूज्य स्वामीजी श्रीगोविन्ददेव गिरिजी महाराज

  • कोषाध्यक्ष श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ न्यास
  • अयोध्या उपाध्यक्ष – श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास, मथुरा

‘एकोऽहं बहु स्याम्’ वेदों का उ‌द्घोष है और यही पूज्य स्वामी श्री गोविंददेव गिरिजी महाराज का परिचय भी है। उनका जीवन धर्मरक्षण, संस्कृति संवर्धन, समाज सेवा एवं राष्ट्र निर्माण को समर्पित भक्ति-कर्म-ज्ञान योग की ऐसी गौरव गाथा है जिसका शब्दों में विवरण करना गागर में सागर भरने जैसा है।

15 वर्ष की किशोरावस्था में पहली बार आपने गीता प्रवचन किया तथा 17 वर्ष की अवस्था से श्रीमदभागवत कथा का शुभारंभ हुआ। पूज्य पाण्डुरंगशास्त्री जी आठवले के तत्त्वज्ञान विद्यापीठ से महाविद्यालयीन शिक्षा प्राप्त करने के बाद काशी के वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय से आपने ‘आचार्य’ की उपाधि प्राप्त की और देखते ही देखते आचार्य श्री किशोरजी व्यास के रूप में आपके अतुलनीय ज्ञान और ओजस्वी वाणी की कीति पताका पूरे विश्व में फैलने लगीं। यहाँ वह समय था जब आपने महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान और गीता परिवार की स्थापना करके क्रमश: वेद संरक्षण और संस्कार साधना का कार्य शुरू किया। कालान्तर में काँवी कामकोटि शंकराचार्य ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती जी महाराज से अनुग्रह दीक्षा लेने के पश्चात् ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी श्री सत्यमित्रानन्दगिरि जी महाराज से आपने संन्यास दीक्षा प्राप्त की। गेरुआ वस्त्र धारण करके आप ‘त्याग और तप’ की उस पवित्र सनातनी परंपरा के वाहक बन गये जिसकी महिमा भारत की मिट्टी के कण-कण और व्यक्ति के मन-मन तक व्याप्त है। कर्म, भक्ति और ज्ञान योग का त्रिवेणी संगम पूज्यश्री के जीवन में प्रतिबिंबित होता है।

गीता परिवार

1986 में पूज्य स्वामीजी द्वारा स्थापित इस संस्था द्वारा सैकड़ों शिविर तथा हज़ारों संस्कार केंद्रों का संचालन। संस्कार साहित्य का प्रकाशन। लाखों बालकों को योग शिक्षा, विद्यालयों में नैतिक शिक्षा, भारतीय पौराणिक महानाट्यों का मंचन, गीता महोत्सव-योग महोत्सव जैसे विशाल कार्यक्रमों का आयोजन, 75 कोटि सूर्यनमस्कार जैसे भव्य कार्यक्रमों का संयोजन, लर्नगीता के माध्यम से 181 देशों में 13 भाषाओं में एवं 8000 सेवाभावी प्रशिक्षकों द्वारा 8 लाख गीता प्रेमियों को निःशुल्क ऑनलाईन गीता प्रशिक्षण।

संत श्री ज्ञानेश्वर गुरुकुल

संत श्री ज्ञानेश्वर गुरुकुल के माध्यम से प्रतिवर्ष ऋषिकेश में गीतासाधना शिविरों का आयोजन, जगद्‌गुरु संत तुकाराम महाराज की लीलास्थली श्री क्षेत्र देहू स्थित गाथा-मंदिर प्रांगण में समर्थ रामदास स्वामी साथक निवास भवन का निर्माण, जहाँ पारंपरिक गुरुकुल पद्धति से वारकरी छात्र संत साहित्य का अध्ययन कर रहे हैं। बीड के गणेश समन्वय आश्रम में सभी जाति के विपन्न बालकों की शिक्षा व्यवस्था करके नया आदर्श निर्माण किया।

महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठानर्वान्पयाध

1990 में स्थापित इस संस्था द्वारा आसेतु-हिमालय 37 वेदविद्यालयों की स्थापना एवं संचालन। वर्तमान में 80 अध्यापकों द्वारा 1929 छात्र निःशुल्क वेद शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। प्रतिवर्ष महर्षि वेदव्यास पुरस्कार, अग्निहोत्रियों का सम्मान, वृद्ध वैदिकों को पेंशन इ. बहुविध कार्य।

श्रीकृष्ण सेवा निधि

श्रीकृष्ण सेवा निधि के अन्तर्गत श्रेष्ठ संत साहित्य का प्रकाशन, अनेक छात्रों को शिक्षा सहयोग, रुग्णसेवा तथा अन्यान्य धर्म कार्य।

श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास

सैकड़ों वर्षों की प्रतीक्षा के बाद स्थापित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास, अयोध्या के कोषाध्यक्ष न्यासी की भूमिका में सेवारत।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास

भारतीय जनमानस के श्रद्धाभक्ति स्थान श्रीकृष्णजन्मभूमि न्यास, मथुरा के उपाध्यक्ष न्यासी की भूमिका में सेवारत।

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